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Al-Humaza

سورة الهمزة

The Traducer9 verses Meccan

Translated by Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

1

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ وَيْلٌ لِكُلِّ هُمَزَةٍ لُمَزَةٍ

तबाही है हर कचो के लगानेवाले, ऐब निकालनेवाले के लिए,

2

الَّذِي جَمَعَ مَالًا وَعَدَّدَهُ

जो माल इकट्ठा करता और उसे गिनता रहा

3

يَحْسَبُ أَنَّ مَالَهُ أَخْلَدَهُ

समझता है कि उसके माल ने उसे अमर कर दिया

4

كَلَّا ۖ لَيُنْبَذَنَّ فِي الْحُطَمَةِ

कदापि नहीं, वह चूर-चूर कर देनेवाली में फेंक दिया जाएगा,

5

وَمَا أَدْرَاكَ مَا الْحُطَمَةُ

और तुम्हें क्या मालूम कि वह चूर-चूर कर देनेवाली क्या है?

6

نَارُ اللَّهِ الْمُوقَدَةُ

वह अल्लाह की दहकाई हुई आग है,

7

الَّتِي تَطَّلِعُ عَلَى الْأَفْئِدَةِ

जो झाँक लेती है दिलों को

8

إِنَّهَا عَلَيْهِمْ مُؤْصَدَةٌ

वह उनपर ढाँककर बन्द कर दी गई होगी,

9

فِي عَمَدٍ مُمَدَّدَةٍ

लम्बे-लम्बे स्तम्भों में