26

Ash-Shu'araa

سورة الشعراء

The Poets227 আয়াত মক্কী

Translated by Muhammad Farooq Khan and Muhammad Ahmed

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

1

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ طسم

ता॰ सीन॰ मीम॰

2

تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ

ये स्पष्ट किताब की आयतें है

3

لَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَفْسَكَ أَلَّا يَكُونُوا مُؤْمِنِينَ

शायद इसपर कि वे ईमान नहीं लाते, तुम अपने प्राण ही खो बैठोगे

4

إِنْ نَشَأْ نُنَزِّلْ عَلَيْهِمْ مِنَ السَّمَاءِ آيَةً فَظَلَّتْ أَعْنَاقُهُمْ لَهَا خَاضِعِينَ

यदि हम चाहें तो उनपर आकाश से एक निशानी उतार दें। फिर उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी रह जाएँ

5

وَمَا يَأْتِيهِمْ مِنْ ذِكْرٍ مِنَ الرَّحْمَٰنِ مُحْدَثٍ إِلَّا كَانُوا عَنْهُ مُعْرِضِينَ

उनके पास रहमान की ओर से जो नवीन अनुस्मृति भी आती है, वे उससे मुँह फेर ही लेते है

6

فَقَدْ كَذَّبُوا فَسَيَأْتِيهِمْ أَنْبَاءُ مَا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ

अब जबकि वे झुठला चुके है, तो शीघ्र ही उन्हें उसकी हक़ीकत मालूम हो जाएगी, जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते रहे है

7

أَوَلَمْ يَرَوْا إِلَى الْأَرْضِ كَمْ أَنْبَتْنَا فِيهَا مِنْ كُلِّ زَوْجٍ كَرِيمٍ

क्या उन्होंने धरती को नहीं देखा कि हमने उसमें कितने ही प्रकार की उमदा चीज़ें पैदा की है?

8

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ

निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है, इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं

9

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ

और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है

10

وَإِذْ نَادَىٰ رَبُّكَ مُوسَىٰ أَنِ ائْتِ الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ

और जबकि तुम्हारे रह ने मूसा को पुकारा कि "ज़ालिम लोगों के पास जा -

11

قَوْمَ فِرْعَوْنَ ۚ أَلَا يَتَّقُونَ

फ़िरऔन की क़ौम के पास - क्या वे डर नहीं रखते?"

12

قَالَ رَبِّ إِنِّي أَخَافُ أَنْ يُكَذِّبُونِ

उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मुझे डर है कि वे मुझे झुठला देंगे,

13

وَيَضِيقُ صَدْرِي وَلَا يَنْطَلِقُ لِسَانِي فَأَرْسِلْ إِلَىٰ هَارُونَ

और मेरा सीना घुटता है और मेरी ज़बान नहीं चलती। इसलिए हारून की ओर भी संदेश भेज दे

14

وَلَهُمْ عَلَيَّ ذَنْبٌ فَأَخَافُ أَنْ يَقْتُلُونِ

और मुझपर उनके यहाँ के एक गुनाह का बोझ भी है। इसलिए मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार डालेंगे।"

15

قَالَ كَلَّا ۖ فَاذْهَبَا بِآيَاتِنَا ۖ إِنَّا مَعَكُمْ مُسْتَمِعُونَ

कहा, "कदापि नहीं, तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ। हम तुम्हारे साथ है, सुनने को मौजूद है

16

فَأْتِيَا فِرْعَوْنَ فَقُولَا إِنَّا رَسُولُ رَبِّ الْعَالَمِينَ

अतः तुम दोनो फ़िरऔन को पास जाओ और कहो कि हम सारे संसार के रब के भेजे हुए है

17

أَنْ أَرْسِلْ مَعَنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ

कि तू इसराईल की सन्तान को हमारे साथ जाने दे।"

18

قَالَ أَلَمْ نُرَبِّكَ فِينَا وَلِيدًا وَلَبِثْتَ فِينَا مِنْ عُمُرِكَ سِنِينَ

(फ़िरऔन ने) कहा, "क्या हमने तुझे जबकि तू बच्चा था, अपने यहाँ पाला नहीं था? और तू अपनी अवस्था के कई वर्षों तक हमारे साथ रहा,

19

وَفَعَلْتَ فَعْلَتَكَ الَّتِي فَعَلْتَ وَأَنْتَ مِنَ الْكَافِرِينَ

और तूने अपना वह काम किया, जो किया। तू बड़ा ही कृतघ्न है।"

20

قَالَ فَعَلْتُهَا إِذًا وَأَنَا مِنَ الضَّالِّينَ

कहा, ऐसा तो मुझसे उस समय हुआ जबकि मैं चूक गया था

21

فَفَرَرْتُ مِنْكُمْ لَمَّا خِفْتُكُمْ فَوَهَبَ لِي رَبِّي حُكْمًا وَجَعَلَنِي مِنَ الْمُرْسَلِينَ

फिर जब मुझे तुम्हारा भय हुआ तो मैं तुम्हारे यहाँ से भाग गया। फिर मेरे रब ने मुझे निर्णय-शक्ति प्रदान की और मुझे रसूलों में सम्मिलित किया

22

وَتِلْكَ نِعْمَةٌ تَمُنُّهَا عَلَيَّ أَنْ عَبَّدْتَ بَنِي إِسْرَائِيلَ

यही वह उदार अनुग्रह है जिसका रहमान तू मुझपर जताता है कि तूने इसराईल की सन्तान को ग़ुलाम बना रखा है।"

23

قَالَ فِرْعَوْنُ وَمَا رَبُّ الْعَالَمِينَ

फ़िरऔन ने कहा, "और यह सारे संसार का रब क्या होता है?"

24

قَالَ رَبُّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِنْ كُنْتُمْ مُوقِنِينَ

उसने कहा, "आकाशों और धरती का रब और जो कुछ इन दोनों का मध्य है उसका भी, यदि तुम्हें यकीन हो।"

25

قَالَ لِمَنْ حَوْلَهُ أَلَا تَسْتَمِعُونَ

उसने अपने आस-पासवालों से कहा, "क्या तुम सुनते नहीं हो?"

26

قَالَ رَبُّكُمْ وَرَبُّ آبَائِكُمُ الْأَوَّلِينَ

कहा, "तुम्हारा रब और तुम्हारे अगले बाप-दादा का रब।"

27

قَالَ إِنَّ رَسُولَكُمُ الَّذِي أُرْسِلَ إِلَيْكُمْ لَمَجْنُونٌ

बोला, "निश्चय ही तुम्हारा यह रसूल, जो तुम्हारी ओर भेजा गया है, बिलकुल ही पागल है।"

28

قَالَ رَبُّ الْمَشْرِقِ وَالْمَغْرِبِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِنْ كُنْتُمْ تَعْقِلُونَ

उसने कहा, "पूर्व और पश्चिम का रब और जो कुछ उनके बीच है उसका भी, यदि तुम कुछ बुद्धि रखते हो।"

29

قَالَ لَئِنِ اتَّخَذْتَ إِلَٰهًا غَيْرِي لَأَجْعَلَنَّكَ مِنَ الْمَسْجُونِينَ

बोला, "यदि तूने मेरे सिवा किसी और को पूज्य एवं प्रभु बनाया, तो मैं तुझे बन्दी बनाकर रहूँगा।"

30

قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكَ بِشَيْءٍ مُبِينٍ

उसने कहा, "क्या यदि मैं तेरे पास एक स्पष्ट चीज़ ले आऊँ तब भी?"

31

قَالَ فَأْتِ بِهِ إِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِقِينَ

बोलाः “अच्छा वह ले आ; यदि तू सच्चा है” ।

32

فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعْبَانٌ مُبِينٌ

फिर उसने अपनी लाठी डाल दी, तो अचानक क्या देखते है कि वह एक प्रत्यक्ष अज़गर है

33

وَنَزَعَ يَدَهُ فَإِذَا هِيَ بَيْضَاءُ لِلنَّاظِرِينَ

और उसने अपना हाथ बाहर खींचा तो फिर क्या देखते है कि वह देखनेवालों के सामने चमक रहा है

34

قَالَ لِلْمَلَإِ حَوْلَهُ إِنَّ هَٰذَا لَسَاحِرٌ عَلِيمٌ

उसने अपने आस-पास के सरदारों से कहा, "निश्चय ही यह एक बड़ा ही प्रवीण जादूगर है

35

يُرِيدُ أَنْ يُخْرِجَكُمْ مِنْ أَرْضِكُمْ بِسِحْرِهِ فَمَاذَا تَأْمُرُونَ

चाहता है कि अपने जादू से तुम्हें तुम्हारी अपनी भूमि से निकाल बाहर करें; तो अब तुम क्या कहते हो?"

36

قَالُوا أَرْجِهْ وَأَخَاهُ وَابْعَثْ فِي الْمَدَائِنِ حَاشِرِينَ

उन्होंने कहा, "इसे और इसके भाई को अभी टाले रखिए, और एकत्र करनेवालों को नगरों में भेज दीजिए

37

يَأْتُوكَ بِكُلِّ سَحَّارٍ عَلِيمٍ

कि वे प्रत्येक प्रवीण जादूगर को आपके पास ले आएँ।"

38

فَجُمِعَ السَّحَرَةُ لِمِيقَاتِ يَوْمٍ مَعْلُومٍ

अतएव एक निश्चित दिन के नियत समय पर जादूगर एकत्र कर लिए गए

39

وَقِيلَ لِلنَّاسِ هَلْ أَنْتُمْ مُجْتَمِعُونَ

और लोगों से कहा गया, "क्या तुम भी एकत्र होते हो?"

40

لَعَلَّنَا نَتَّبِعُ السَّحَرَةَ إِنْ كَانُوا هُمُ الْغَالِبِينَ

कदाचित हम जादूगरों ही के अनुयायी रह जाएँ, यदि वे विजयी हुए

41

فَلَمَّا جَاءَ السَّحَرَةُ قَالُوا لِفِرْعَوْنَ أَئِنَّ لَنَا لَأَجْرًا إِنْ كُنَّا نَحْنُ الْغَالِبِينَ

फिर जब जादूगर आए तो उन्होंने फ़िरऔन से कहा, "क्या हमारे लिए कोई प्रतिदान भी है, यदि हम प्रभावी रहे?"

42

قَالَ نَعَمْ وَإِنَّكُمْ إِذًا لَمِنَ الْمُقَرَّبِينَ

उसने कहा, "हाँ, और निश्चित ही तुम तो उस समय निकटतम लोगों में से हो जाओगे।"

43

قَالَ لَهُمْ مُوسَىٰ أَلْقُوا مَا أَنْتُمْ مُلْقُونَ

मूसा ने उनसे कहा, "डालो, जो कुछ तुम्हें डालना है।"

44

فَأَلْقَوْا حِبَالَهُمْ وَعِصِيَّهُمْ وَقَالُوا بِعِزَّةِ فِرْعَوْنَ إِنَّا لَنَحْنُ الْغَالِبُونَ

तब उन्होंने अपनी रस्सियाँ और लाठियाँ डाल दी और बोले, "फ़िरऔन के प्रताप से हम ही विजयी रहेंगे।"

45

فَأَلْقَىٰ مُوسَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ تَلْقَفُ مَا يَأْفِكُونَ

फिर मूसा ने अपनी लाठी फेकी तो क्या देखते है कि वह उसे स्वाँग को, जो वे रचाते है, निगलती जा रही है

46

فَأُلْقِيَ السَّحَرَةُ سَاجِدِينَ

इसपर जादूगर सजदे में गिर पड़े

47

قَالُوا آمَنَّا بِرَبِّ الْعَالَمِينَ

वे बोल उठे, "हम सारे संसार के रब पर ईमान ले आए -

48

رَبِّ مُوسَىٰ وَهَارُونَ

मूसा और हारून के रब पर!"

49

قَالَ آمَنْتُمْ لَهُ قَبْلَ أَنْ آذَنَ لَكُمْ ۖ إِنَّهُ لَكَبِيرُكُمُ الَّذِي عَلَّمَكُمُ السِّحْرَ فَلَسَوْفَ تَعْلَمُونَ ۚ لَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُمْ مِنْ خِلَافٍ وَلَأُصَلِّبَنَّكُمْ أَجْمَعِينَ

उसने कहा, "तुमने उसको मान लिया, इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति देता। निश्चय ही वह तुम सबका प्रमुख है, जिसने तुमको जादू सिखाया है। अच्छा, शीघ्र ही तुम्हें मालूम हुआ जाता है! मैं तुम्हारे हाथ और पाँव विपरीत दिशाओं से कटवा दूँगा और तुम सभी को सूली पर चढ़ा दूँगा।"

50

قَالُوا لَا ضَيْرَ ۖ إِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا مُنْقَلِبُونَ

उन्होंने कहा, "कुछ हरज नहीं; हम तो अपने रब ही की ओर पलटकर जानेवाले है

51

إِنَّا نَطْمَعُ أَنْ يَغْفِرَ لَنَا رَبُّنَا خَطَايَانَا أَنْ كُنَّا أَوَّلَ الْمُؤْمِنِينَ

हमें तो इसी की लालसा है कि हमारा रब हमारी ख़ताओं को क्षमा कर दें, क्योंकि हम सबसे पहले ईमान लाए।"

52

۞ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِي إِنَّكُمْ مُتَّبَعُونَ

हमने मूसा की ओर प्रकाशना की, "मेरे बन्दों को लेकर रातों-रात निकल जा। निश्चय ही तुम्हारा पीछा किया जाएगा।"

53

فَأَرْسَلَ فِرْعَوْنُ فِي الْمَدَائِنِ حَاشِرِينَ

इसपर फ़िरऔन ने एकत्र करनेवालों को नगर में भेजा

54

إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَشِرْذِمَةٌ قَلِيلُونَ

कि "यह गिरे-पड़े थोड़े लोगों का एक गिरोह है,

55

وَإِنَّهُمْ لَنَا لَغَائِظُونَ

और ये हमें क्रुद्ध कर रहे है।

56

وَإِنَّا لَجَمِيعٌ حَاذِرُونَ

और हम चौकन्ना रहनेवाले लोग है।"

57

فَأَخْرَجْنَاهُمْ مِنْ جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ

इस प्रकार हम उन्हें बाग़ों और स्रोतों

58

وَكُنُوزٍ وَمَقَامٍ كَرِيمٍ

और ख़जानों और अच्छे स्थान से निकाल लाए

59

كَذَٰلِكَ وَأَوْرَثْنَاهَا بَنِي إِسْرَائِيلَ

ऐसा ही हम करते है और इनका वारिस हमने इसराईल की सन्तान को बना दिया

60

فَأَتْبَعُوهُمْ مُشْرِقِينَ

सुबह-तड़के उन्होंने उनका पीछा किया

61

فَلَمَّا تَرَاءَى الْجَمْعَانِ قَالَ أَصْحَابُ مُوسَىٰ إِنَّا لَمُدْرَكُونَ

फिर जब दोनों गिरोहों ने एक-दूसरे को देख लिया तो मूसा के साथियों ने कहा, "हम तो पकड़े गए!"

62

قَالَ كَلَّا ۖ إِنَّ مَعِيَ رَبِّي سَيَهْدِينِ

उसने कहा, "कदापि नहीं, मेरे साथ मेरा रब है। वह अवश्य मेरा मार्गदर्शन करेगा।"

63

فَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنِ اضْرِبْ بِعَصَاكَ الْبَحْرَ ۖ فَانْفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍ كَالطَّوْدِ الْعَظِيمِ

तब हमने मूसा की ओर प्रकाशना की, "अपनी लाठी सागर पर मार।"

64

وَأَزْلَفْنَا ثَمَّ الْآخَرِينَ

और हम दूसरों को भी निकट ले आए

65

وَأَنْجَيْنَا مُوسَىٰ وَمَنْ مَعَهُ أَجْمَعِينَ

हमने मूसा को और उन सबको जो उसके साथ थे, बचा लिया

66

ثُمَّ أَغْرَقْنَا الْآخَرِينَ

और दूसरों को डूबो दिया

67

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ

निस्संदेह इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं

68

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ

और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है

69

وَاتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ إِبْرَاهِيمَ

और उन्हें इबराहीम का वृत्तान्त सुनाओ,

70

إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ مَا تَعْبُدُونَ

जबकि उसने अपने बाप और अपनी क़ौंम के लोगों से कहा, "तुम क्या पूजते हो?"

71

قَالُوا نَعْبُدُ أَصْنَامًا فَنَظَلُّ لَهَا عَاكِفِينَ

उन्होंने कहा, "हम बुतों की पूजा करते है, हम तो उन्हीं की सेवा में लगे रहेंगे।"

72

قَالَ هَلْ يَسْمَعُونَكُمْ إِذْ تَدْعُونَ

उसने कहा, "क्या ये तुम्हारी सुनते है, जब तुम पुकारते हो,

73

أَوْ يَنْفَعُونَكُمْ أَوْ يَضُرُّونَ

या ये तुम्हें कुछ लाभ या हानि पहुँचाते है?"

74

قَالُوا بَلْ وَجَدْنَا آبَاءَنَا كَذَٰلِكَ يَفْعَلُونَ

उन्होंने कहा, "नहीं, बल्कि हमने तो अपने बाप-दादा को ऐसा ही करते पाया है।"

75

قَالَ أَفَرَأَيْتُمْ مَا كُنْتُمْ تَعْبُدُونَ

उसने कहा, "क्या तुमने उनपर विचार भी किया कि जिन्हें तुम पूजते हो,

76

أَنْتُمْ وَآبَاؤُكُمُ الْأَقْدَمُونَ

तुम और तुम्हारे पहले के बाप-दादा?

77

فَإِنَّهُمْ عَدُوٌّ لِي إِلَّا رَبَّ الْعَالَمِينَ

वे सब तो मेरे शत्रु है, सिवाय सारे संसार के रब के,

78

الَّذِي خَلَقَنِي فَهُوَ يَهْدِينِ

जिसने मुझे पैदा किया और फिर वही मेरा मार्गदर्शन करता है

79

وَالَّذِي هُوَ يُطْعِمُنِي وَيَسْقِينِ

और वही है जो मुझे खिलाता और पिलाता है

80

وَإِذَا مَرِضْتُ فَهُوَ يَشْفِينِ

और जब मैं बीमार होता हूँ, तो वही मुझे अच्छा करता है

81

وَالَّذِي يُمِيتُنِي ثُمَّ يُحْيِينِ

और वही है जो मुझे मारेगा, फिर मुझे जीवित करेगा

82

وَالَّذِي أَطْمَعُ أَنْ يَغْفِرَ لِي خَطِيئَتِي يَوْمَ الدِّينِ

और वही है जिससे मुझे इसकी आकांक्षा है कि बदला दिए जाने के दिन वह मेरी ख़ता माफ़ कर देगा

83

رَبِّ هَبْ لِي حُكْمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَ

ऐ मेरे रब! मुझे निर्णय-शक्ति प्रदान कर और मुझे योग्य लोगों के साथ मिला।

84

وَاجْعَلْ لِي لِسَانَ صِدْقٍ فِي الْآخِرِينَ

और बाद के आनेवालों में से मुझे सच्ची ख़्याति प्रदान कर

85

وَاجْعَلْنِي مِنْ وَرَثَةِ جَنَّةِ النَّعِيمِ

और मुझे नेमत भरी जन्नत के वारिसों में सम्मिलित कर

86

وَاغْفِرْ لِأَبِي إِنَّهُ كَانَ مِنَ الضَّالِّينَ

और मेरे बाप को क्षमा कर दे। निश्चय ही वह पथभ्रष्ट लोगों में से है

87

وَلَا تُخْزِنِي يَوْمَ يُبْعَثُونَ

और मुझे उस दिन रुसवा न कर, जब लोग जीवित करके उठाए जाएँगे।

88

يَوْمَ لَا يَنْفَعُ مَالٌ وَلَا بَنُونَ

जिस दिन न माल काम आएगा और न औलाद,

89

إِلَّا مَنْ أَتَى اللَّهَ بِقَلْبٍ سَلِيمٍ

सिवाय इसके कि कोई भला-चंगा दिल लिए हुए अल्लाह के पास आया हो।"

90

وَأُزْلِفَتِ الْجَنَّةُ لِلْمُتَّقِينَ

और डर रखनेवालों के लिए जन्नत निकट लाई जाएगी

91

وَبُرِّزَتِ الْجَحِيمُ لِلْغَاوِينَ

और भडकती आग पथभ्रष्टि लोगों के लिए प्रकट कर दी जाएगी

92

وَقِيلَ لَهُمْ أَيْنَ مَا كُنْتُمْ تَعْبُدُونَ

और उनसे कहा जाएगा, "कहाँ है वे जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते रहे हो?

93

مِنْ دُونِ اللَّهِ هَلْ يَنْصُرُونَكُمْ أَوْ يَنْتَصِرُونَ

क्या वे तुम्हारी कुछ सहायता कर रहे है या अपना ही बचाव कर सकते है?"

94

فَكُبْكِبُوا فِيهَا هُمْ وَالْغَاوُونَ

फिर वे उसमें औंधे झोक दिए जाएँगे, वे और बहके हुए लोग

95

وَجُنُودُ إِبْلِيسَ أَجْمَعُونَ

और इबलीस की सेनाएँ, सबके सब।

96

قَالُوا وَهُمْ فِيهَا يَخْتَصِمُونَ

वे वहाँ आपस में झगड़ते हुए कहेंगे,

97

تَاللَّهِ إِنْ كُنَّا لَفِي ضَلَالٍ مُبِينٍ

"अल्लाह की क़सम! निश्चय ही हम खुली गुमराही में थे

98

إِذْ نُسَوِّيكُمْ بِرَبِّ الْعَالَمِينَ

जबकि हम तुम्हें सारे संसार के रब के बराबर ठहरा रहे थे

99

وَمَا أَضَلَّنَا إِلَّا الْمُجْرِمُونَ

और हमें तो बस उन अपराधियों ने ही पथभ्रष्ट किया

100

فَمَا لَنَا مِنْ شَافِعِينَ

अब न हमारा कोई सिफ़ारिशी है,

101

وَلَا صَدِيقٍ حَمِيمٍ

और न घनिष्ट मित्र

102

فَلَوْ أَنَّ لَنَا كَرَّةً فَنَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ

क्या ही अच्छा होता कि हमें एक बार फिर पलटना होता, तो हम मोमिनों में से हो जाते!"

103

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ

निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकरतर माननेवाले नहीं

104

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ

और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है

105

كَذَّبَتْ قَوْمُ نُوحٍ الْمُرْسَلِينَ

नूह की क़ौम ने रसूलों को झुठलाया;

106

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ نُوحٌ أَلَا تَتَّقُونَ

जबकि उनसे उनके भाई नूह ने कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?

107

إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ

निस्संदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ

108

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ

अतः अल्लाह का डर रखो और मेरा कहा मानो

109

وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ

मैं इस काम के बदले तुमसे कोई बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है

110

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ

अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो।"

111

۞ قَالُوا أَنُؤْمِنُ لَكَ وَاتَّبَعَكَ الْأَرْذَلُونَ

उन्होंने कहा, "क्या हम तेरी बात मान लें, जबकि तेरे पीछे तो अत्यन्त नीच लोग चल रहे है?"

112

قَالَ وَمَا عِلْمِي بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ

उसने कहा, "मुझे क्या मालूम कि वे क्या करते रहे है?

113

إِنْ حِسَابُهُمْ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّي ۖ لَوْ تَشْعُرُونَ

उनका हिसाब तो बस मेरे रब के ज़िम्मे है। क्या ही अच्छा होता कि तुममें चेतना होती।

114

وَمَا أَنَا بِطَارِدِ الْمُؤْمِنِينَ

और मैं ईमानवालों को धुत्कारनेवाला नहीं हूँ।

115

إِنْ أَنَا إِلَّا نَذِيرٌ مُبِينٌ

मैं तो बस स्पष्ट रूप से एक सावधान करनेवाला हूँ।"

116

قَالُوا لَئِنْ لَمْ تَنْتَهِ يَا نُوحُ لَتَكُونَنَّ مِنَ الْمَرْجُومِينَ

उन्होंने कहा, "यदि तू बाज़ न आया ऐ नूह, तो तू संगसार होकर रहेगा।"

117

قَالَ رَبِّ إِنَّ قَوْمِي كَذَّبُونِ

उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मेरी क़ौम के लोगों ने तो मुझे झुठला दिया

118

فَافْتَحْ بَيْنِي وَبَيْنَهُمْ فَتْحًا وَنَجِّنِي وَمَنْ مَعِيَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ

अब मेरे और उनके बीच दो टूक फ़ैसला कर दे और मुझे और जो ईमानवाले मेरे साथ है, उन्हें बचा ले!"

119

فَأَنْجَيْنَاهُ وَمَنْ مَعَهُ فِي الْفُلْكِ الْمَشْحُونِ

अतः हमने उसे और जो उसके साथ भरी हुई नौका में थे बचा लिया

120

ثُمَّ أَغْرَقْنَا بَعْدُ الْبَاقِينَ

और उसके पश्चात शेष लोगों को डूबो दिया

121

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ

निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं

122

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ

और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है

123

كَذَّبَتْ عَادٌ الْمُرْسَلِينَ

आद ने रसूलों को झूठलाया

124

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ هُودٌ أَلَا تَتَّقُونَ

जबकि उनके भाई हूद ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?

125

إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ

मैं तो तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ

126

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ

अतः तुम अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा मानो

127

وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ

मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता। मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़ि्म्मे है।

128

أَتَبْنُونَ بِكُلِّ رِيعٍ آيَةً تَعْبَثُونَ

क्या तुम प्रत्येक उच्च स्थान पर व्यर्थ एक स्मारक का निर्माण करते रहोगे?

129

وَتَتَّخِذُونَ مَصَانِعَ لَعَلَّكُمْ تَخْلُدُونَ

और भव्य महल बनाते रहोगे, मानो तुम्हें सदैव रहना है?

130

وَإِذَا بَطَشْتُمْ بَطَشْتُمْ جَبَّارِينَ

और जब किसी पर हाथ डालते हो तो बिलकुल निर्दय अत्याचारी बनकर हाथ डालते हो!

131

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ

अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो

132

وَاتَّقُوا الَّذِي أَمَدَّكُمْ بِمَا تَعْلَمُونَ

उसका डर रखो जिसने तुम्हें वे चीज़े पहुँचाई जिनको तुम जानते हो

133

أَمَدَّكُمْ بِأَنْعَامٍ وَبَنِينَ

उसने तुम्हारी सहायता की चौपायों और बेटों से,

134

وَجَنَّاتٍ وَعُيُونٍ

और बाग़ो और स्रोतो से

135

إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ

निश्चय ही मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े दिन की यातना का भय है।"

136

قَالُوا سَوَاءٌ عَلَيْنَا أَوَعَظْتَ أَمْ لَمْ تَكُنْ مِنَ الْوَاعِظِينَ

उन्होंने कहा, "हमारे लिए बराबर है चाहे तुम नसीहत करो या नसीहत करने वाले न बनो।

137

إِنْ هَٰذَا إِلَّا خُلُقُ الْأَوَّلِينَ

यह तो बस पहले लोगों की पुरानी आदत है

138

وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ

और हमें कदापि यातना न दी जाएगी।"

139

فَكَذَّبُوهُ فَأَهْلَكْنَاهُمْ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ

अन्ततः उन्होंने उन्हें झुठला दिया जो हमने उनको विनष्ट कर दिया। बेशक इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं

140

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ

और बेशक तुम्हारा रब ही है, जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है

141

كَذَّبَتْ ثَمُودُ الْمُرْسَلِينَ

समूद ने रसूलों को झुठलाया,

142

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ صَالِحٌ أَلَا تَتَّقُونَ

जबकि उसके भाई सालेह ने उससे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?

143

إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ

निस्संदेह मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ

144

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ

अतः तुम अल्लाह का डर रखो और मेरी बात मानो

145

وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ

मैं इस काम पर तुमसे कोई बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है

146

أَتُتْرَكُونَ فِي مَا هَاهُنَا آمِنِينَ

क्या तुम यहाँ जो कुछ है उसके बीच, निश्चिन्त छोड़ दिए जाओगे,

147

فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ

बाग़ों और स्रोतों

148

وَزُرُوعٍ وَنَخْلٍ طَلْعُهَا هَضِيمٌ

और खेतों और उन खजूरों में जिनके गुच्छे तरो ताज़ा और गुँथे हुए है?

149

وَتَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا فَارِهِينَ

तुम पहाड़ों को काट-काटकर इतराते हुए घर बनाते हो?

150

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ

अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो

151

وَلَا تُطِيعُوا أَمْرَ الْمُسْرِفِينَ

और उन हद से गुज़र जानेवालों की आज्ञा का पालन न करो,

152

الَّذِينَ يُفْسِدُونَ فِي الْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ

जो धरती में बिगाड़ पैदा करते है, और सुधार का काम नहीं करते।"

153

قَالُوا إِنَّمَا أَنْتَ مِنَ الْمُسَحَّرِينَ

उन्होंने कहा, "तू तो बस जादू का मारा हुआ है।

154

مَا أَنْتَ إِلَّا بَشَرٌ مِثْلُنَا فَأْتِ بِآيَةٍ إِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِقِينَ

तू बस हमारे ही जैसा एक आदमी है। यदि तू सच्चा है, तो कोई निशानी ले आ।"

155

قَالَ هَٰذِهِ نَاقَةٌ لَهَا شِرْبٌ وَلَكُمْ شِرْبُ يَوْمٍ مَعْلُومٍ

उसने कहा, "यह ऊँटनी है। एक दिन पानी पीने की बारी इसकी है और एक नियत दिन की बारी पानी लेने की तुम्हारी है

156

وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوءٍ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابُ يَوْمٍ عَظِيمٍ

तकलीफ़ पहुँचाने के लिए इसे हाथ न लगाना, अन्यथा एक बड़े दिन की यातना तुम्हें आ लेगी।"

157

فَعَقَرُوهَا فَأَصْبَحُوا نَادِمِينَ

किन्तु उन्होंने उसकी कूचें काट दी। फिर पछताते रह गए

158

فَأَخَذَهُمُ الْعَذَابُ ۗ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ

अन्ततः यातना ने उन्हें आ दबोचा। निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं

159

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ

और निस्संदेह तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयाशील है

160

كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ الْمُرْسَلِينَ

लूत की क़ौम के लोगों ने रसूलों को झुठलाया;

161

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ لُوطٌ أَلَا تَتَّقُونَ

जबकि उनके भाई लूत ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?

162

إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ

मैं तो तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ

163

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ

अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो

164

وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ

मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता, मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है

165

أَتَأْتُونَ الذُّكْرَانَ مِنَ الْعَالَمِينَ

क्या सारे संसारवालों में से तुम ही ऐसे हो जो पुरुषों के पास जाते हो,

166

وَتَذَرُونَ مَا خَلَقَ لَكُمْ رَبُّكُمْ مِنْ أَزْوَاجِكُمْ ۚ بَلْ أَنْتُمْ قَوْمٌ عَادُونَ

और अपनी पत्नियों को, जिन्हें तुम्हारे रब ने तुम्हारे लिए पैदा किया, छोड़ देते हो? इतना ही नहीं, बल्कि तुम हद से आगे बढ़े हुए लोग हो।"

167

قَالُوا لَئِنْ لَمْ تَنْتَهِ يَا لُوطُ لَتَكُونَنَّ مِنَ الْمُخْرَجِينَ

उन्होंने कहा, "यदि तू बाज़ न आया, ऐ लतू! तो तू अवश्य ही निकाल बाहर किया जाएगा।"

168

قَالَ إِنِّي لِعَمَلِكُمْ مِنَ الْقَالِينَ

उसने कहा, "मैं तुम्हारे कर्म से अत्यन्त विरक्त हूँ।

169

رَبِّ نَجِّنِي وَأَهْلِي مِمَّا يَعْمَلُونَ

ऐ मेरे रब! मुझे और मेरे लोगों को, जो कुछ ये करते है उसके परिणाम से, बचा ले।"

170

فَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ أَجْمَعِينَ

अन्ततः हमने उसे और उसके सारे लोगों को बचा लिया;

171

إِلَّا عَجُوزًا فِي الْغَابِرِينَ

सिवाय एक बुढ़िया के जो पीछे रह जानेवालों में थी

172

ثُمَّ دَمَّرْنَا الْآخَرِينَ

फिर शेष दूसरे लोगों को हमने विनष्ट कर दिया।

173

وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ مَطَرًا ۖ فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنْذَرِينَ

और हमने उनपर एक बरसात बरसाई। और यह चेताए हुए लोगों की बहुत ही बुरी वर्षा थी

174

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ

निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं

175

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ

और निश्चय ही तुम्हारा रब बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है

176

كَذَّبَ أَصْحَابُ الْأَيْكَةِ الْمُرْسَلِينَ

अल-ऐकावालों ने रसूलों को झुठलाया

177

إِذْ قَالَ لَهُمْ شُعَيْبٌ أَلَا تَتَّقُونَ

जबकि शुऐब ने उनसे कहा, "क्या तुम डर नहीं रखते?

178

إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ

मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ

179

فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ

अतः अल्लाह का डर रखो और मेरी आज्ञा का पालन करो

180

وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ

मैं इस काम पर तुमसे कोई प्रतिदान नहीं माँगता। मेरा प्रतिदान तो बस सारे संसार के रब के ज़िम्मे है

181

۞ أَوْفُوا الْكَيْلَ وَلَا تَكُونُوا مِنَ الْمُخْسِرِينَ

तुम पूरा-पूरा पैमाना भरो और घाटा न दो

182

وَزِنُوا بِالْقِسْطَاسِ الْمُسْتَقِيمِ

और ठीक तराज़ू से तौलो

183

وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ أَشْيَاءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ

और लोगों को उनकी चीज़ों में घाटा न दो और धरती में बिगाड़ और फ़साद मचाते मत फिरो

184

وَاتَّقُوا الَّذِي خَلَقَكُمْ وَالْجِبِلَّةَ الْأَوَّلِينَ

उसका डर रखो जिसने तुम्हें और पिछली नस्लों को पैदा किया हैं।"

185

قَالُوا إِنَّمَا أَنْتَ مِنَ الْمُسَحَّرِينَ

उन्होंने कहा, "तू तो बस जादू का मारा हुआ है

186

وَمَا أَنْتَ إِلَّا بَشَرٌ مِثْلُنَا وَإِنْ نَظُنُّكَ لَمِنَ الْكَاذِبِينَ

और तू बस हमारे ही जैसा एक आदमी है और हम तो तुझे झूठा समझते है

187

فَأَسْقِطْ عَلَيْنَا كِسَفًا مِنَ السَّمَاءِ إِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِقِينَ

फिर तू हमपर आकाश को कोई टुकड़ा गिरा दे, यदि तू सच्चा है।"

188

قَالَ رَبِّي أَعْلَمُ بِمَا تَعْمَلُونَ

उसने कहा, " मेरा रब भली-भाँति जानता है जो कुछ तुम कर रहे हो।"

189

فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَهُمْ عَذَابُ يَوْمِ الظُّلَّةِ ۚ إِنَّهُ كَانَ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ

किन्तु उन्होंने उसे झुठला दिया। फिर छायावाले दिन की यातना ने आ लिया। निश्चय ही वह एक बड़े दिन की यातना थी

190

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُمْ مُؤْمِنِينَ

निस्संदेह इसमें एक बड़ी निशानी है। इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं

191

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ

और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है, जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है

192

وَإِنَّهُ لَتَنْزِيلُ رَبِّ الْعَالَمِينَ

निश्चय ही यह (क़ुरआन) सारे संसार के रब की अवतरित की हुई चीज़ है

193

نَزَلَ بِهِ الرُّوحُ الْأَمِينُ

इसको लेकर तुम्हारे हृदय पर एक विश्वसनीय आत्मा उतरी है,

194

عَلَىٰ قَلْبِكَ لِتَكُونَ مِنَ الْمُنْذِرِينَ

ताकि तुम सावधान करनेवाले हो

195

بِلِسَانٍ عَرَبِيٍّ مُبِينٍ

स्पष्ट अरबी भाषा में

196

وَإِنَّهُ لَفِي زُبُرِ الْأَوَّلِينَ

और निस्संदेह यह पिछले लोगों की किताबों में भी मौजूद है

197

أَوَلَمْ يَكُنْ لَهُمْ آيَةً أَنْ يَعْلَمَهُ عُلَمَاءُ بَنِي إِسْرَائِيلَ

क्या यह उनके लिए कोई निशानी नहीं है कि इसे बनी इसराईल के विद्वान जानते है?

198

وَلَوْ نَزَّلْنَاهُ عَلَىٰ بَعْضِ الْأَعْجَمِينَ

यदि हम इसे ग़ैर अरबी भाषी पर भी उतारते,

199

فَقَرَأَهُ عَلَيْهِمْ مَا كَانُوا بِهِ مُؤْمِنِينَ

और वह इसे उन्हें पढ़कर सुनाता तब भी वे इसे माननेवाले न होते

200

كَذَٰلِكَ سَلَكْنَاهُ فِي قُلُوبِ الْمُجْرِمِينَ

इसी प्रकार हमने इसे अपराधियों के दिलों में पैठाया है

201

لَا يُؤْمِنُونَ بِهِ حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ

वे इसपर ईमान लाने को नहीं, जब तक कि दुखद यातना न देख लें

202

فَيَأْتِيَهُمْ بَغْتَةً وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ

फिर जब वह अचानक उनपर आ जाएगी और उन्हें ख़बर भी न होगी,

203

فَيَقُولُوا هَلْ نَحْنُ مُنْظَرُونَ

तब वे कहेंगे, "क्या हमें कुछ मुहलत मिल सकती है?"

204

أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ

तो क्या वे लोग हमारी यातना के लिए जल्दी मचा रहे है?

205

أَفَرَأَيْتَ إِنْ مَتَّعْنَاهُمْ سِنِينَ

क्या तुमने कुछ विचार किया? यदि हम उन्हें कुछ वर्षों तक सुख भोगने दें;

206

ثُمَّ جَاءَهُمْ مَا كَانُوا يُوعَدُونَ

फिर उनपर वह चीज़ आ जाए, जिससे उन्हें डराया जाता रहा है;

207

مَا أَغْنَىٰ عَنْهُمْ مَا كَانُوا يُمَتَّعُونَ

तो जो सुख उन्हें मिला होगा वह उनके कुछ काम न आएगा

208

وَمَا أَهْلَكْنَا مِنْ قَرْيَةٍ إِلَّا لَهَا مُنْذِرُونَ

हमने किसी बस्ती को भी इसके बिना विनष्ट नहीं किया कि उसके लिए सचेत करनेवाले याददिहानी के लिए मौजूद रहे हैं।

209

ذِكْرَىٰ وَمَا كُنَّا ظَالِمِينَ

हम कोई ज़ालिम नहीं है

210

وَمَا تَنَزَّلَتْ بِهِ الشَّيَاطِينُ

इसे शैतान लेकर नहीं उतरे हैं।

211

وَمَا يَنْبَغِي لَهُمْ وَمَا يَسْتَطِيعُونَ

न यह उन्हें फबता ही है और न ये उनके बस का ही है

212

إِنَّهُمْ عَنِ السَّمْعِ لَمَعْزُولُونَ

वे तो इसके सुनने से भी दूर रखे गए है

213

فَلَا تَدْعُ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ فَتَكُونَ مِنَ الْمُعَذَّبِينَ

अतः अल्लाह के साथ दूसरे इष्ट-पूज्य को न पुकारना, अन्यथा तुम्हें भी यातना दी जाएगी

214

وَأَنْذِرْ عَشِيرَتَكَ الْأَقْرَبِينَ

और अपने निकटतम नातेदारों को सचेत करो

215

وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِمَنِ اتَّبَعَكَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ

और जो ईमानवाले तुम्हारे अनुयायी हो गए है, उनके लिए अपनी भुजाएँ बिछाए रखो

216

فَإِنْ عَصَوْكَ فَقُلْ إِنِّي بَرِيءٌ مِمَّا تَعْمَلُونَ

किन्तु यदि वे तुम्हारी अवज्ञा करें तो कह दो, "जो कुछ तुम करते हो, उसकी ज़िम्मेदारी से मं1 बरी हूँ।"

217

وَتَوَكَّلْ عَلَى الْعَزِيزِ الرَّحِيمِ

और उस प्रभुत्वशाली और दया करनेवाले पर भरोसा रखो

218

الَّذِي يَرَاكَ حِينَ تَقُومُ

जो तुम्हें देख रहा होता है, जब तुम खड़े होते हो

219

وَتَقَلُّبَكَ فِي السَّاجِدِينَ

और सजदा करनेवालों में तुम्हारे चलत-फिरत को भी वह देखता है

220

إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ

निस्संदेह वह भली-भाँति सुनता-जानता है

221

هَلْ أُنَبِّئُكُمْ عَلَىٰ مَنْ تَنَزَّلُ الشَّيَاطِينُ

क्या मैं तुम्हें बताऊँ कि शैतान किसपर उतरते है?

222

تَنَزَّلُ عَلَىٰ كُلِّ أَفَّاكٍ أَثِيمٍ

वे प्रत्येक ढोंग रचनेवाले गुनाहगार पर उतरते है

223

يُلْقُونَ السَّمْعَ وَأَكْثَرُهُمْ كَاذِبُونَ

वे कान लगाते है और उनमें से अधिकतर झूठे होते है

224

وَالشُّعَرَاءُ يَتَّبِعُهُمُ الْغَاوُونَ

रहे कवि, तो उनके पीछे बहके हुए लोग ही चला करते है।-

225

أَلَمْ تَرَ أَنَّهُمْ فِي كُلِّ وَادٍ يَهِيمُونَ

क्या तुमने देखा नहीं कि वे हर घाटी में बहके फिरते हैं,

226

وَأَنَّهُمْ يَقُولُونَ مَا لَا يَفْعَلُونَ

और कहते वह है जो करते नहीं? -

227

إِلَّا الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَذَكَرُوا اللَّهَ كَثِيرًا وَانْتَصَرُوا مِنْ بَعْدِ مَا ظُلِمُوا ۗ وَسَيَعْلَمُ الَّذِينَ ظَلَمُوا أَيَّ مُنْقَلَبٍ يَنْقَلِبُونَ

वे नहीं जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए और अल्लाह को अधिक .याद किया। औऱ इसके बाद कि उनपर ज़ुल्म किया गया तो उन्होंने उसका प्रतिकार किया और जिन लोगों ने ज़ुल्म किया, उन्हें जल्द ही मालूम हो जाएगा कि वे किस जगह पलटते हैं